शब्द चले तीर से, पर लक्ष्य से परे रहे,
कर्म के परिणाम सब प्रत्यक्ष से परे रहे !
शब्दभेदी बाडों से सत्य कौन भेदेगा ?
रक्त ना होने दो सफ़ेद , क्यूंकि रक्त तो दौडेगा !!

रक्त नहीं जीवन सिर्फ, वह एक विचारधारा है,
वर्ना तो रंग एक था, ये विचारों का खेल सारा है
आचरण न रहे तो रक्त क्या रह जायेगा, लाल रंग युहीं कभी श्वेत सा हो जायेगा !
फिर ये जीवन क्या रहेगा, मन किस्से मोह जोडेगा ?
रक्त ना होने दो सफ़ेद , क्यूंकि रक्त तो दौडेगा !!

उठा तीर और भेद दे की सब विचार एक हो
और बने तू ऐसा तूफ़ान की सब दिशाएं नेक हो
मत सोच वो आयेगा खुद, और जीवन प्रवाह मोड़ेगा !
रक्त ना होने दो सफ़ेद , क्यूंकि रक्त तो दौडेगा !!