कौन निकाले इन फंदों से जीवन जैसे Local minima!
कुछ संत बने भभूत रमा कर , कुछ चरण पूज सिन्दूर सजा कर,
अपने अपने पथ पर जा सब खोज रहे हैं Global minima,
कौन निकाले इन फंदों से जीवन जैसे Local minima, !!
वो बैठा है सागर गर्भ में, वो है पत्थर में कण कण में,
सब अलग अलग हैं मार्ग बताते, क्या कोई जाने उसकी सीमा ?
कौन निकाले इन फंदों से जीवन जैसे Local minima,
अपने अपने पथ पर जा सब खोज रहे हैं Global minima!!
सत्य है क्या मस्तिष्क ना जाने, पर हृदय सत्य बतलाता है,
पर कर्म विवश मस्तिष्क के हाथो, हृदय मंद मुस्काता है.
इन दोनों के अथक युद्ध से, हम सीख रहे हैं जीवन जीना,
कौन निकाले इन फंदों से जीवन जैसे Local minima,
अपने अपने पथ पर जा सब खोज रहे हैं Global minima!!
#1 by Pritish@IIITA on September 23rd, 2009
Quote
Good analogy, keep it up.
#2 by Vandana on July 15th, 2010
Quote
Very nice work Rohit.
Very impressive.