हे प्रभु तू मन को हर ले !!
अपने विवेक से मैंने जैसा जीवन चाहा,
अपने कर्मो से उस जीवन को ख़ाक बनाया.
वो कर्म ही क्या जो जीवन का उद्धार ना कर ले,
इसलिए, हे प्रभु तू मन को हर ले !!
मानव बनने का मतलब क्या, जब पशुता मन पर व्यापित हो,
मेरे हर कर्म से मेरा निहित स्वार्थ सत्यापित हो.
इससे पहले पशुता मन पर अपना घर कर ले ,
हे प्रभु तू मन को हर ले!!
हर बोझ से भारी है ये मन का भार,
हर जीत के बाद सताती इसको हार.
मन की ये गति जीवन का कहीं वेग ना हर ले,
इस से पहले, हे प्रभु तू मन को हर ले!!
#1 by n on October 11th, 2009
Quote
a good one
#2 by Sudarshan Loya on October 13th, 2009
Quote
It was like past 1 month come true. Good one and perfect fit.
#3 by Surjeet Singh Nehra on October 16th, 2009
Quote
Happy Birthday Bhai Sahab!!!!!!!!!!