हे प्रभु तू मन को हर ले !!
अपने विवेक से मैंने जैसा जीवन चाहा,
अपने कर्मो से उस जीवन को ख़ाक बनाया.
वो कर्म ही क्या जो जीवन का उद्धार ना कर ले,
इसलिए, हे प्रभु तू मन को हर ले !!

मानव बनने का मतलब क्या, जब पशुता मन पर व्यापित हो,
मेरे हर कर्म से मेरा निहित स्वार्थ सत्यापित हो.
इससे पहले पशुता मन पर अपना घर कर ले ,
हे प्रभु तू मन को हर ले!!

हर बोझ से भारी है ये मन का भार,
हर जीत के बाद सताती इसको हार.
मन की ये गति जीवन का कहीं वेग ना हर ले,
इस से पहले, हे प्रभु तू मन को हर ले!!