उड़ता रहा उस दीप को छूने की सिर्फ आस में,
पंख थे थक गए और कंठ सूखा प्यास में.
पर अथक मेहनत से आकाश सारा हिल गया,
दीप छूने मैं चला और सूर्य मुझको मिल गया !!

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